स्वपरागित से लेकर पूर्णतया परपरागित फसलों की प्रजनन की विधियाँ उदाहरणों के साथ समझायी गयी हैं। संकर ओज प्रजनन, उत्परिवर्तन प्रजनन, गुणज प्रजनन, रोग एवं कीटरोधिता के लिए प्रजनन तथा पादप प्रजनन की अभिनव विधियों का विस्तार से वर्णन किया गया है। अंत में पादप प्रजनन के अपने देश में संगठन और उनकी उपलब्धियों तथा प्रजाति विमोचन और उनके बीज उत्पादन का सचित्र वर्णन किया गया है। पुस्तक की भाषा ऐसी रखी गयी है कि साधारण से साधारण विद्यार्थी भी इसे आसानी से समझ सके । वैज्ञानिक शब्दों की हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं के वर्णक्रम के अनुसार सारणी भी दी गयी है। कुल मिलाकर यह अपने तरह की अनूठी पुस्तक है जो आधुनिकतम उदाहरणों के साथ पादप प्रजनन जैसे कठिन विषय को सरल भाषा में आपके सामने प्रस्तुत कर रही है । आशा है कि शिक्षक एवं शिक्षार्थी इसका पूर्ण लाभ उठायेंगे ।
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